gazal by s k gupta

तेरा ही  चेहरा जा ब जा नज़र आता है

तेरी  आखों मे मयकदा नज़र आता है

 

तेरे पास तो वह आबे हयात है  साकी

मुझे जीने का सिलसिला नज़र आता है

 

तेरी ख्वाहिश की ही गरमी से ऐ सनम

पलाश भी दहकता हुआ नज़र आता है

 

तेरे तसव्वुरात पर काबू नही रहता जब

इश्क भी पगलाया  सा नजर  आता है

 

चांद को  आगोश मे  भर लेने  को ही

समंदर हमेशा मचलता नज़र  आता है

 

बंद आखों ने तो मंजर यह भी देखा है

मुझको  उम्र का ढलना नज़र  आता है

 

ऐ मेरी  नाबाद मुहब्बत के पयम्बर मेरे

मुझे तुझमे अपना खुदा नज़र  आता है

 

     जा ब जा    –   हर तरफ

S k gupta

098370249

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