#Gazal by s k gupta

हमने जमाने में  ऐसे भी खार देखे हैं

जिगर छलनी कर दे  वह यार देखे हैं

 

मुहब्बत भी जिन के काम नही आई

वह नफरतें  ही मांगते  उधार  देखे हैं

 

नफरतें ही नफरतें रहा करती हैं जंहा

बंजर  उस घर के  दरो दीवार देखे हैं

 

दिल सीने मे है  नही जुबान मुह मे है

फिर भी करते वह  नए करार देखे हैं

 

मुकर जाते हैं सौदा कर के भी तो वो

ऐसे भी तो बहुत सारे खरीदार देखे हैं

 

एक चिराग कह कर बुझ गया था यह

टूटते सितारे तो उसने बार बार देखे हैं

 

जिदंगी तेरी चाह मे तडपते दिलों  को

वेनटीलेटर पर धडकते बार बार देखे हैं

 

S k gupta

09837024900

667 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.