#Gazal by s k gupta

थक गए थे  चलते चलते हम भी ना

कुछ पल को ठहर  गए थे हम भी ना

 

इश्क़ का दरिया बह रहा था मुसलसल

किनारे खड़े हो गए थे उसके हम भी ना

 

तस्वीरें दिल में  हमारे भी कईं कैद थी

बहा आए सबको दरिया मे हम भी ना

 

पहले पता न था इश्क दवा है कि दर्द

सारी ही हदें पार कर गए थे हम भी ना

 

आसान नही था बदल लेना  खुद को

इश्क़ में पागल हो गए थे  हम भी ना

 

छूने से ही तो परख होती है चीज की

कितना मगरूर हो रहे थे  हम भी ना

 

इस तरह से वक्त गुजरा था न गुजरेगा

निभा रहे थे किस खूबी से हम भी ना

 

संभलने के लिए  राह बदली थी हमने

कितने अब तनहा हो गए थे हम भी ना

 

दिल मे मलाल बस  एक यही रह गया

होठों से कुछ  कह सके थे  हम भी ना

 

दिल ही दिल मे पूजने लगे थे हम उसे

पत्थर को देवता समझे थे  हम भी ना

 

 

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