#Gazal by sameer shahi

हसीन हादसा

उसका हमपर बाकी बड़ा एहसान है,
उसे भूलना वैसे भी कहाँ आसान है.
उसका मिलना एक हसीन हादसा ठहरा,
जेहन पर कायम मुकम्मल निशान है.

दो पल मिले कभी – गुफ्तगू भी की,
पता चला उनके मुंह में भी जबान है.
रास्ते में मिलता है अज़नबी की तरह,
हमीं जानते हैं उसे – वो तो अनजान है.

तेरे शहर में अपना ठिकाना पक्का है,
पैरों तले ज़मीन है-सर पे आसमान है.
मीलों या सदियों में कहा सिमटेगा,
ये फासला जो तेरे-मेरे दरमियान है.

बंद कमरे में समेट रखो सर्द आहें अपनी,
बाहर गर्मी बहुत है औ’ बढ़ा तापमान है,
उसके ख़्वाबों में गर्दिश किसी और की है,
हमारा नाम तो मुफ्त में ही बदनाम है….

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3 thoughts on “#Gazal by sameer shahi

  • June 2, 2016 at 4:03 am
    Permalink

    Thanks for the post…

  • June 2, 2016 at 4:23 am
    Permalink

    बहुत सुंदर समीर
    बहुत बधाई

  • August 12, 2016 at 11:42 am
    Permalink

    उसके ख़्वाबों में गर्दिश किसी और की है,
    हमारा नाम तो मुफ्त में ही बदनाम है….

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