#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

ज़िन्दगी के सफर में, शुकून का अहसास है रिश्ता !
जो न टूटे सात जन्मों तक, ऐसा विश्वास है रिश्ता !

जो ग़मों के समंदर से भी खींच लाता है हमें बाहर,
ऐसे ही निश्छल प्यार का, एक अहसास है रिश्ता !

कभी सिन्दूर की लाली कभी चूड़ियों की वो खनक,
दिलों को जोड़ने का, एक सुखद अहसास है रिश्ता !

कभी माँ बाप कभी भाई बहन तो कभी बेटा बेटी,
सबका एक धागे में बंधे होने का, अहसास है रिश्ता !

कितने ही मिलकर बिछड़ गए छोटी सी ज़िन्दगी में,
उनकी भूली बिसरी यादों का, प्यारा संसार है रिश्ता  !

बड़ी ही जतन से रखे जाते हैं ये अपनों के दिल यारो,
सदा ही उनको बचाये रखने का, अहसास है रिश्ता !

रूठना मनाना तो अपनों का सिर्फ दिखावा है “मिश्र “,
मीठी तकरार में मनुहार का, सुखद अहसास है रिश्ता !

शांती स्वरूप मिश्र

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