#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

यारो सच्चाई तो अब, बीती सी कहानी हो गयी !
कहावत सच की जीत वाली,अब पुरानी हो गयी !

झूठ ही झूठ बिकता है दुनिया के बाज़ार में अब,
सच्चाई की कीमत तो अब ,पानी पानी हो गयी !

भला दौलत के आगे अब सच की क्या बिसात,
बनाना झूठ को सच, जीत की निशानी हो गयी !

बर्बाद हैं जो थाम कर बैठे हैं सच्चाई का दामन,
कैसे कहें उनसे कि, ये तकनीक पुरानी हो गयी !

“मिश्र” ढूढ़ लो तुम भी कोई झूठों की महफ़िल,
क्योंकि सच्चाई की मज़लिसों में, वीरानी हो गयी !

शांती स्वरूप मिश्र

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