#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

जिस दिन से उनसे दूर हुए, हमने तो हँसना छोड़ दिया !
बस क़ैद हुए हम दीवारों में, बाहर निकलना छोड़ दिया !

जब तक थे वो मेरे क़रीब दिल की कली मुस्काती थी,
गुलशन में अब क्या रखा है, फूलों ने महकना छोड़ दिया !

कितनी मुद्दत गुज़र गयी हमें अब तो कुछ भी याद नहीं,
यादों का कारवां गुज़र गया, आँखों ने छलकना छोड़ दिया !

कभी देखी हैं गज़ब की रुसबाईं बेचारे इस दिल ने भी,
वो सोच सोच कर हार गया, उसने भी मचलना छोड़ दिया !

शांती स्वरूप मिश्र

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