gazal by suraj

तेरे दर फरियाद भी अंग्रेज़ी दूकान जैसी है /

मयस्सर हर वक़्त है मुकम्मल नही होती //

 

 

नोटो पर नाम उसका लिखा हो कभी/

रखो सम्भाल दौलत ईमान से//

रातो ने माना जागती है, वो/

निकले नही कदम, अभी खानदान से//

बुलंदी में मुहब्बत हो, या अच्छे बुरे दिन/

आगाज़ रहे पायदान से//

उसका रह गया होता/

दावत थी हादसे-इम्तिहान से//

फ़र्क अपनी सराफ़त मे नको मिया/

कौफ़ियत होती है बेईमान से//

प्यार विजातीय की तो क्या/

शादी होगी किसी अंजान से//

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