Gazal By Vivek Tripathi vij

आदमी       बेकार     होता   जा   रहा
राह   का   अख़बार   होता   जा   रहा
नफ़रतें    लायीं     हैं     परदेसी   हवा
मतलबी     संसार     होता   जा   रहा
जल   रहा  इंसान    अब    इंसान   से
जुल्म    का   अंगार   होता   जा   रहा
झूठ   पसरा  है   ज़हा   में  इस   तरह
सच  से  ही  इनकार   होता  जा   रहा
कामनायें    बड़   रही   है   जीस्त   में
फ़िक्र  पर  अधिकार  होता  जा   रहा
देखता     तक्सीन    होते    देश    को
दूर   अब   घर   बार   होता  जा   रहा
-विवेक त्रिपाठी”विज्ञ”
अम्बेडकर नगर
9648353231

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