#Gazal byv Govind Charan

गजल

 

तारे   आसमा  मे  चांद   भी  आसमा  मे  रहता है।

चांदनी महसूस करने का नजरिया जहाँ मे रहता है॥

 

बिगाड़ के तबीयत अपनी जब इन्सान, इन्सा से टकराता है

उडती है खाक ईमान की यह गौर दोनो पहलू रहता है ॥

 

लूट कर जब शहर को अपनी बस्ती मे लूटेरा आता है

सम्भाल के  लूट  अपनी , खुदा  को   सलाम कहता है ॥

 

राह पे जब कोई मुसाफिर थाम के इरादे चलता है

बिगड़ती बाधाओ को  भी  गजब  सी  निगाह  से देखता है ॥

गोविन्द चारण

 

 

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