#Gazal by Devesh Dixit

-ग़ज़ल (तुम्हें सावन बुलाता है)——–

 

ये आँखें राह तकती हैं, तुम्हें ये मन बुलाता है

चले आओ तुम्हें सूना मेरा आँगन बुलाता है

 

बरसती रोज़ हैं आँखें, ये बारिश ही नहीं रुकती

तुम्हें भीगे हुये अश्कों का ये दामन बुलाता है

 

जहाँ पेंगें बढ़ाते थे,शज़र वो याद करते हैं

वो झूले पूछते हैं अब, तुम्हें सावन बुलाता है

 

गुलिस्तां जब से उजड़ा है,वहारें भी नहीं लौटीं

फ़िजा आवाज़ देती है, तुम्हें उपवन बुलाता है

 

दर-ओ-दीवार औ राहें,सभी सदमें में रहती हैं

सँवरते थे जहाँ पहले,वही दरपन बुलाता है

 

चले आओ कि अब तन्हाइयाँ जीने नहीं देतीं

तुम्हें उजड़े हुये दिल का ये सूनापन बुलाता है

 

देवेश दीक्षित9794778813

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