#Gazal By Dharmender Arora

तसव्वुर को हक़ीक़त में फ़क़त शायर बदलता है!
क़लम की धार से अपनी सभी मंज़र बदलता है!!

मिटा दो नफ़रतें सारी जलाओ प्यार की शम्मा!
बहार-ए-शादमानी हो गमे पतझर बदलता है!!

बनाई जोड़ियां रब ने सुहानी बात ये समझो!
ज़रा सी बात के पीछे नहीं दिलबर बदलता है!!

करो निष्काम ही सेवा समर्पण भाव भी रखना!
रखे समभाव का दर्ज़ा कहां तरुवर
बदलता है!!

मिले शोहरत अगर तुमको कभी मग़रूर मत होना!
नहीं दिन एक से रहते समां अक्सर बदलता है!!

निराली आत्मा होती करो श्रृंगार तुम इसका!
विदा होने पे’ दुनिया से जहाँ नश्वर बदलता है!!

सदाकत रक़्स करती है मुसाफ़िर के तरानों में!
फ़रेबे ज़िंदग़ी को रात-दिन जमकर बदलता है!!
धर्मेन्द्र अरोड़ा ‘मुसाफ़िर’
(9034376051)

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