#Gazal by Dharmender Arora Musafir

देेश की कर रहे जो हिफ़ाज़त सदा!
उन जवानों से ज़िंदा शुजाअत सदा!!

चालबाज़ी अगरचे ज़रा भी मिली!
वैरियों की हुई फ़िर क़यामत सदा!!

जोश दिल में निराला रखें बांकुरे!
पर नज़र से झलक़ती शराफ़त सदा!!

ज़िंदगी का निराला यही फ़लसफ़ा!
आरज़ू से अलग है हक़ीक़त सदा!!

रहमतों से खुदा की तो’ जाना यही!
देश सेवा ही’ सच्ची इबादत सदा!!

काट दें दुश्मनों के सिरों को भी’ हम!
बस हमें रोकती है लियाक़त सदा!!

आज के रहबरों से मुसाफ़िर कहे!
अब ज़हन में रखो तुम सदाक़त सदा!!

(शुजाअत=वीरता,शूरता)
धर्मेन्द्र अरोड़ा

“मुसाफ़िर पानीपती”

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