#Gazal by Dinesh Pratap Singh Chauhan

“हिंदी ग़ज़ल”
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ईसा को सलीबें मिलती हैं,..सुकरात को प्याले मिलते हैं,
इस दुनियां में फिर भी हमको,सच बोलने वाले मिलते हैं ।
रातों की साजिशें सूरज को,….. हर रोज डुबो ही देती हैं,
स्याही को देकर मात मग़र,..सूरज मतवाले निकलते हैं ।
वो लोग भी हैं जो एक उसूल पर,…. अपनी जाँ दे देते हैं,
और कुछ,उसूल कपड़ों की तरह,. बदलने वाले मिलते हैं ।
हम से राही की, राहें भी,……. सदियों से राहें तकती हैं,
होंगे वो और कि,…. . बनी बनायी राहों पर जो चलते हैं ।
कुछ जीवन ऎसे होते हैं,….. . . शर्मिन्दा जीवन को करते,
कुछ मौतें ऐसी होती हैं,…. . . जीवन भी जिसे तरसते हैं ।
हम जैसे लोगों से ही ये,…… बाज़ार की रौनक ज़िंदा है,
बिकने की गर हम सोच भी लें,…. सारे बाज़ार उतरते हैं ।
राजा की पदवी की कीमत,…. शाहों की सेज सजाना है,
राणा की पदवी में प्यारे,… . घासों के निवाले मिलते हैं ।
“दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

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