#Gazal by Dipti Gour ‘Deep’

रिश्ता दिल से बनाए रखिएगा l

राजे उल्फत छुपाए रखिएगा  l

तुमको ठोकर जहां ने दी लेकिन,

आस की लौ जलाए रखिएगा

उसने दी है किताब गजलों की,

घर की रौनक बनाए रखिएगा l

जब भी देखोगे नजर आऊंगी ,

दिल में शीशा लगाए रखिएगा l

घर की बेटी खुदा की नैमत है,

लाज इसकी बचाए रखिएगा l

जाने किस वक्त कोई आ जाए,

अपनी महफिल सजाए रखिएगा l

उलझनें ज़िन्दगी में काफी हैं ,

गुल खुशी के खिलाये रखिएगा l

रोज मिलते हैं नसीहतों के निशां

‘दीप’ दिल में समाए रखिएगा l

-:रचनाकार:-डॉ. दीप्ति गौड़ ‘दीप’ग्वालियर मध्यप्रदेश

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