#Gazal by Dr Daksh B Pattya

जब तक जमी~आशमा ये कायनात रहे|

मेरे गितो मे मेहकता तेरा अहसास रहे||

नहो रुखसत रहे साथ बनके साया मेरा|

ईस दिल की है आरजु तु मेरे पास रहे||

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नुरानी चेहरा चाँद सा जुल्फो मे बहकी शाम|

रेशमी नर्म बाहे आँखे है रँग.एँ.आशमा||

चाँदनी बिखेरती चँदन सी सौम्य काया|

कितनी फुरसदो से रब ने तुझे बनाया||

चुमलु लब तेरे,अधरो पे मेरी प्यास रहे|

ईस दिल की है आरजु तु मेरे पास रहे|| 1||

 

पाया जो तुमको मिल गँई जन्नत मुझे|

तुम हो ख्वाब मेरे फल गंई मन्नत मुझे||

मेरे प्राणपृष्ट पर प्रितकी अल्पना तु बनी|

तेरे प्रेम सेही जिवन की कल्पनाएँ सनी||

तेरे बाद ना फिर अधुरी मेरी आस रहे|

ईस दिल की है आरजु तु मेरे पास रहे|| 2||

 

ना गम कीहो घटाये बरसे नकोई सावन|

हमको जो मिलाये बेला हो ऐसी पावन||

चिलमन से चाँद झाँकेओ चाँदनी रात हो|

खामोश हो जुबा मगर आँखो मेबात हो||

तेरी शासो मे घुलती मेरी हर शास रहे|

ईस दिल की है आरजु तु मेरे पास रहे|| 3||

 

डा. दक्ष बी. पटैया

बैतुल(म.प्र.)

9479351986

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