#Gazal by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav

गजल

जीवन को बेहतर बनाऊँ मैं कैसे, जमाने में शोहरत कमाऊँ मैं कैसे।

यही चल रहा है मगज में हमारे, सबक दुश्मनों को सिखाऊँ मैं कैसे ।

भीतर से झुकना नहीं चाहता जो, निवेदन में उसको झुकाऊं में कैसे।

सभी जानते हैं मोहब्बत हमारी, हकीकत को दिल में छुपाऊँ मैं कैसे।

ग़ज़ल से हमारी जिन्हें चोट लगती,

उन्हें दर्द अपना सुनाऊँ मैं कैसे। समय से ये कर्जा अदा कर सकूंगा,

तुम्हें यह भरोसा दिलाऊं मैं कैसे। सच तो यही युग का कॉलर पकड़ लूं ,

मगर इतनी हिम्मत जुटाऊँ मैं कैसे।

पड़ोसी पे उंगली उठा लूँ भले ही, कमी अपने घर की गिनाऊं मैं कैसे।

निगाहों में तुम मेरी इतने गिरे हो, कलम अपनी तुम पर चलाऊँ मैं कैसे ।

—–   डॉ. कृष्ण कुमार तिवारी नीरव

 

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One thought on “#Gazal by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav

  • November 21, 2017 at 4:01 am
    Permalink

    बहुत खूबसूरत ग़ज़ल। लेखक को बधाई

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