#Gazal by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav

गजल

कब्र से उठके उसने पुकारा मुझे,

कुछ नहीं चाहिए अब तुम्हारा मुझे।

मुझको दरिया की कोई जरूरत नहीं ,

छोड़ दो हो सके तो किनारा मुझे।

अपनी रक्षा में गर हाथ मेरा उठा,

दोष मत दीजिएगा दोबारा मुझे ।

अन्न से भेंट दिन भर नहीं हो सकी,

ऐसा बाँधे रहा भाईचारा मुझे।

दौड़ते-दौड़ते जिंदगी थक गई ,

कब मिलेगा भला हक हमारा मुझे।

आपका और मेरा तनाजा यही,

आप देते हो झटका करारा मुझे।

डॉ.कृष्ण कुमार तिवारी नीरव

 

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