#Gazal by Dr Krishan Kumar Tiwari Neerav

गजल
बगल जो बैठने लायक नहीं इंसान के क्रम में ,
उन्हीं को मंच मिलता है यहां सम्मान के क्रम में ।
बहुत तकलीफ होती है जिन्हें सुनकर खुदा जानें,
उन्हें ही देखता हूं हर जगह मेहमान के क्रम में ।
अगर मेरी चले इन लीडरों को बेदखल कर दूं ,
यह पहला लक्ष्य समझो आपने अभियान के क्रम में ।

सही अर्थों में जो हकदार हैं वह कुछ नहीं पाते ,
नजर आते हैं दौलतमंद ही अनुदान के क्रम में ।
कहां सोचा गया था देश बन जाएगा अमरीका ,
कहां पहुंचा नहीं यह आज तक जापान के क्रम में ।
जिन्हें जेलों में होना चाहिए जब तक रहे जिंदा ,
वही सत्ता में बैठे हैं सचिव ,परधान के क्रम में ।
अरे यह आजकल के संत भी कितने पतित निकले,

रिआया पूजती आई जिन्हें भगवान के क्रम में ।
—–डॉ. कृष्ण कुमार तिवारी नीरव

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