#Gazal by Dr Krishan Kumar Tiwari Neerav

गजल

अदा वह फर्ज ड्यूटी का जो आठों याम करता है,

तुम्हारी इस व्यवस्था में कहां आराम करता है ।

तजुर्बा है ये जिसमें काम का जज्बा नहीं होता ,

किसी भी कर्मचारी को वही बदनाम करता है ।

वही अब पास होता है लिफाफा भेंट जो करता ,

हजारों में उसी का फैसला एग्जाम करता है ।

सियासत मंदिरों या मस्जिदों की हो रही है जो ,

कहां हिंदू इसे करता कहां इस्लाम करता है ।

नमक रोटी भी खाकर चैन से जीने नहीं देता ,

जमाना बेगुनाहों पर बड़ा इल्जाम करता है ।

बड़े घर का नहीं होता कभी मजदूर बाबूजी !

दिहाड़ी पर जो बेचारा हमेशा काम करता है ।

—–डॉ. कृष्ण कुमार तिवारी नीरव

 

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