#Gazal by Dr Krishan Kumar Tiwari Neerav

गजल
स्वार्थ में डूब दिल के तराने गये,
जिंदगी से मोहब्बत के माने गये।
बाग का पूर्वज पेड़ जब से कटा ,
कितनी चिड़ियों के अपने ठिकाने गये।
हम शहर छोड़कर गांव लौटे नहीं
लोग कहते रहे हम कमाने गये।
घर गया तो गया इसका कुछ गम नहीं
गम यही है कि रिश्ते पुराने गये ।
देखकर उसको बैराग्य पैदा हुआ,
उसकी अर्थी को जब हम उठाने गये।
दर्द वातावरण का वही जानता,
जिसके जीवन से मौसम सुहाने गये।
——– डॉ.कृष्ण कुमार तिवारी नीरव

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