#Gazal by Dr Krishan Kumart Tiwari Neerav

गजल
तमस हावी हो रहा है ज्योति बुझती जा रही,
आदमी की आंख में है धूल पड़ती जा रही ।
फेर में दौलत के बिल्कुल आदमी अंधा हुआ,
पाप करते करते सारी उम्र ढलती जा रही ।
बढ़ रही है इस कदर कुछ वैमनस की भावना,
जैसे परती खेत में हो दूब उगती जा रही ।
राम मुख में दर्शते छूरी बगल में सोहती,
इस जमाने की यही तस्वीर बनती जा रही।
अपने प्रति सुख और सुविधा हम बहुत कुछ चाहते,
दूसरों के वास्ते यह सोच घटती जा रही ।
आज से कल क्या कहूं कल से भी परसों हो गया ,

व्यक्तिगत लालच में अपनी बात टलती जा रही।
ईद का त्यौहार हो या होलिका का पर्व हो,
पुलिस वालों की जरूरत रोज बढ़ती जा रही ।
——-डॉ.कृष्ण कुमार तिवारी नीरव

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