#Gazal Dr Naresh Sagar

** गजल ****

वो बगावत पर उतारू हो गये

ना समझ भी अब जुझारू हो गये

 

फेंकते है अब वही कीचड यहाँ

सभ्यता के जो लताडू हो गये

 

बात मत कहना कभी दिल की यहाँ

उनके सारे वादे झाडू हो गये

 

महँगाई की मार ने इतना है मारा

देखो आलू आज आडू हो गये

 

जिनको हमनें सोचा सच्चे-सीधे है

वो ही “सागर” अब जुगाडू हो गये

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बैखोफ शायर..

डाँ. नरेश कुमार “सागर”

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