#Gazal by Dr Prakhar Dixit

लिखा कुछ दिल का दर्द उभर आया ।
देखा पहलू में चांद तो सबर आया ।।

तेरी यादों में बेचैनियों की बारात
रात फिर सपनों का शहर आया।।

तुम नहीं तो मेरी ये दुनिया वीरानी
उनके खत में बेख्याली ज़हर आया।

ये सही वो दिल से हैं फिदा हम पर
बस उनकी हामी का न सहर आया।।

वो हमप्याला वो हमराज भी हमारे
सुकूं प्रखर अब रंगी मधु पहर आया। ।

कितना छुपाऊँ मैं लब ए तबस्सुम
बाद मुद्दतों के इश्क़िया पहर आया।।

अजी छोड़ो दिलजलों की बातें
वो बेजा प्यार का बन कहर आया।।

प्रखर नासमझ खत ओ किताबत में,
तुम्हें प्यार का न काफिया न बहर आया।।

प्रखर
फर्रुखाबाद

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