#Gazal by Dr. Sulaxna Ahlawat

तेरी मोहब्बत में गुजारी हर शाम याद आती है,

तन्हा रातों में सिसकने को मजबूर कर जाती है।

 

कभी कहते थे तुम मुझे, तुम बहुत तड़पाती हो,

मैंने नहीं तड़पाया पर याद तुम्हारी तड़पाती है।

 

बेवफाई नहीं की तुमने, मैं जानती हूँ मजबूर थे,

पर क्यों तुम कह नहीं सके, यही बात सताती है।

 

गम जुदाई का नहीं, तेरे खामोश रह जाने का है,

तुम्हें यकीन नहीं था मुझ पर, खामोशी बताती है।

 

जुदा होना ही था तो कुछ इस तरह से होते तुम,

कह सकते कि देखकर आज भी वो मुस्कुराती है।

 

अब मिलने पर नजरें भी एक ही सवाल करती हैं,

क्या मोहब्बत, मोहब्बत से हाल ए दिल छिपाती है।

 

पहचान नहीं सके तुम “सुलक्षणा” की मोहब्बत को,

वो तो आज भी तुम्हारे लिए दुआ में हाथ उठाती है।

 

डॉ सुलक्षणा

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