#Gazal by Er. Anand Sagar Pandey

मेरी राहों से चाहत हटा लो ना तुम,
टूट जाने दो मुझको संभालो ना तुम।

यह चुभन रास आती है अब रूह को,
मेरे पैरों से कांटे निकालो ना तुम।

लौटकर फिर ना आओ मेरी राह में,
कम से कम एक वादा निभा लो ना तुम।

गिर चुके हो बहुत तुम मेरी आंख में,
मुझको छोड़ो खुदी को उठा लो ना तुम।

इस सफर में मुझे डूब जाना ही था,
इल्तजा है के खुद को बचा लो ना तुम।

मैं नहीं आने वाला हूं अब लौट कर,
कोई वहम-ओ-गुमां दिल में पालो ना तुम।

इश्क से कोई नफरत ना कर बैठे कल,
इस कहानी को सबसे छुपा लो ना तुम ।

मैं हूं “सागर” लबों तक उतर आऊंगा,
दो घड़ी को मुझे गुनगुना लो ना तुम।।

-Er Anand Sagar Pandey,”अनन्य देवरिया”

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