#Gazal by Gaurav Pandey Rudra

अश्क़ों से हम याद मिटाने बैठ गए।

तन्हाई में दिल समझाने बैठ गए।।

 

ख़ुद अपनी मंज़िल की जिनको ख़बर नही।

आज वही रस्ता बतलाने बैठ गए।।

 

वक़्त इजाज़त देता नही हमें फिर भी।

टूटे फूटे ख़्वाब सजाने बैठ गए।।

 

आँखे तो हैं ख़ुद ही दिल का आईना।

नाहक तुम यूँ राज़ छुपाने बैठ गए।।

 

इस मंज़र पर उसकी रहमत झूम उठी।

बच्चे माँओं के सरहाने बैठ गए।।

 

सात जनम की कसमें खाने की ख़ातिर।

पास में आकर दो अनजाने बैठ गए।।

 

साँझ ढले छाया है जब से सन्नाटा।

पक्षी भी घर में सुस्ताने बैठ गए।।

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