#Gazal by Har Prasad Pushpak

महक फूलों की देखकर वहक गया है जो ।
आंधियां कब चली उसको पता नही होता ।।

छोड़कर अख्तियार अपनी जिंन्दगानी का ।
चला वो किस तरफ उसको पता नही होता ।।

सिर झुकाया है तो इवादत भी अब कर ही लो ।
सुकून चेन का तब तक पता नही होता ।।

जिसे सोने के लिये रात कम पड़गयी होगी ।
सुवह उजालों का उसको पता नही होता ।।

जख्म देकर के चुपचाप निकल गया है जो ।
तड़फता वो भी रहाउसका भला नही होता ।।

मौसमें रूख की भी तासीर बदलती पुष्पक ।
वरना ठंडा कभी गरम कभी नही होता ।।

वेखबर जो रहे है अपनी आदतों से अब तक।
खुद की तकदीर का उनको पता नही होता ।।

लिवास में ही लगते रहे खूबसूरत से वो ।
मगर साऊर के उनके कुछ पता नही होता ।।

हरप्रसाद पुष्पक
ऊ.सि.नगर (उत्तराखण्ड)
मो. 099277 21977

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