#Gazal By Ishaan Sharma Anand

किनारों को किनारों से मिलाऊँ,
अधूरों को मुकम्मल फिर बनाऊं।

मुझे समझो न तन मैं आत्मा हूं,
हकीकत हूं हकीकत ही कहाऊं।

चलो बातें करें कुछ आज ऐसे,
न बोलो तुम न मैं ही कुछ बताऊँ।

खुदा इतना करम कर दे फ़कत तू,
कि जब खुद से मिलूँ तो मुस्कुराऊं।

चिराग-ऐ-शब मेरी सूरत जला दो,
मेरे हालात मैं खुद क्या बताऊं।

लहू से दूं तेरे होठों को लाली,
तेरा माथा सितारों से सजाऊं।

जमाने को कभी किस्मत को कोसूं,
बहाने पर बहाने मैं बनाऊं।

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