#Gazal by Ishaan Sharma Anand

तेरे हर ख़त तेरी तस्वीर को अब तक सम्भाला है,
इन्हीं चिंगारियों से ज़िंदगी में कुछ उजाला है।

किसी भूखे की मैंने आस उस पल तोड़ कर रख दी,
कि खाली जेब से जब हाथ को मैंने निकाला है।

सफर आसाँ नहीं मेरा, कि मैं भी एक आशिक हूँ,
कभी राहों में काँटे हैं, कभी पैरों में छाला है।

कि जब दिल टूटता है, दूर तक आवाज़ जाती है,
पता चलता है किसने मुस्कुराना छोड़ डाला है।

वही मदहोश है यारो, कि जिसने पी नहीं अब तक,
नशा जिसने किया उस नूर का वो होश वाला है।

ईशान शर्मा “आनन्द”

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