#Gazal by Ishaan Sharma Anand

शबाब पर है हिजाब देखो,

बाज़ार का इज़्तिराब देखो।।

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हवा को बांधे निकल पड़ा है,

हबाब का ये रुआब देखो।।

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निभा रहा है वफा ज़माना,

निगाह में हैं सराब देखो।।

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किया न धोका, न बेवफाई,

हुआ न मुझसे हिसाब देखो।।

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शबाब भी है, शराब भी है,

घड़ी मगर है ख़राब देखो।।

आनन्द”

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