#Gazal by Ishq Sharma

हँसती खेलती मेरी ज़िंदगी, एक रिस्क ने मारा है।

दुनिया मौत से मरती है,  मुझे तेरे इश्क़ ने मारा है।

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ज़हन में  मुहब्बत भरभर कर थक गया हार गया।

लेकर तो तुम्हें जाना था मुझमें जो दिल तुम्हारा है।

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मेरे दिलके साथ धड़क धड़क कर बिलख़ रहा है।

कुछ तो सुलह करते जाते  ये वक़्त जाँ तुम्हारा है।

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सूनी सूनी  मेरी  हर डगर शाम ओ शहर तेरे बग़ैर।

मेरीज़िंदगी मेरीबन्दग़ी मेरा पलपल जाँ तुम्हारा है।

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काटे कटे न रात घनेरी क्यूँ बैठी तू तनहा अकेली।

बर्बाद कितना तेरेबिन  मुझमें जो इश्क़ तुम्हारा है।

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तसव्वुर तुम मेरी  तिश्नगी  हो मेरे अंजुमन में बसे।

ज़ागीर से अपनी ले लो तुम हिस्सा जो तुम्हारा है।

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दख़ल से तेरे  दिल के दर पे  दास्तां यूँ बनती रही।

सजती रही ताउम्र तुम उजड़ा सा इश्क़ तुम्हारा है।

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खुर्रमऐइश्क़ कब था भला  मैं ख़्वार में जीता रहा।

जबजब मेरी प्यास बढ़ी खिलाफ इश्क़ तुम्हारा है।

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ख़लिश है हवाओंमें फ़िज़ाओंमें दिल ख़स्ता पड़ा।

तेरा ख़्वाब है  मैं  जी  रहा इश्क़ ख़ुश्क तुम्हारा है।

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ज़ा हि र  है  मैं  हूँ  नही  ज़ ही र  या  जिया  तेरा।

गिरेबां में तू झाँक देख  पाकीज़ा इश्क़ तुम्हारा है।

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