#Gazal by Ishq Sharma

  • • मौत की दुहाई ••••••••••••••
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नफरत हो या मुहब्बत आसान है कहाँ।।

हर शख्स ग़म को लेकर परेशान है यहाँ।

मुश्किल लगे है जीना मुझे तो अब यहाँ।

ढूँढू कहाँ ख़ुशी, अब मैं जाऊँ तो कहाँ।।

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अलग अलग हर शख्स की रहती है कहानी।

किसी की दर्द से भरी, किसी की रूहानी।।।

जिस रीती से चलती दुनिया वो रीती पुराणी।

गीता कुरान बाईबिल हर ग्रंथ है जिंदगानी।।

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वेशभूषा की तरह यहाँ मज़हब बदलते लोग।।

बहा के खून अपनों का सज़दे में झुकते लोग।

ऐसी तेरी ख़ुद्दारी मेरे मौला मैं देखा।

रोते बिछा के लाश हँसते थे जिसपे लोग।।

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बहुत हुआ अब बसकर तू दे दे रिहाई।।

तड़पती रोती ज़िन्दगी मेरे रास न आई।

सुला दे नींद ऐसी , कभी आँख न खुले।

गर है ख़ुदा तू मेरा , कर इतनी ख़ुदाई।।

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© इश्क़शर्माप्यारसे✍📲9827237387

 

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