#Gazal by Ishq Sharma

ढूंढ़कर ले आओ बहाना किसीका

चाहिए ही नही ठिकाना किसीका

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अक्सर पलकें भीग  जाती  है पर

भूलना  नही है  भूलाना किसीका

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सहम – सहम कर मैं रहता हूँ अब

बदला है चेहरा रोजाना किसीका

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यादें  हर  वक़्त  कचोटती है मुझे

याद है मुझे  याद आना किसीका

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सहुँ भी तो  मैं  कितना सहुँ यारों

लहज़ा नही है  सुहाना किसीका

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मंडराती रहे तितलियां फूलों पर

देखना ही नही  मनाना किसीका

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मेरे साथ रहो इतना ही कहा,मगर

जायज़ कहाँ समझाना  किसीका

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खुश नही पर अब करूँ तो क्या

क्यूँ  सुनु  मैं  भी  ताना किसीका

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तालीम जाने किससे मिली उसे

बहुत खूब होगा सरगना किसीका

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बेख़बर को अब ये खबर दे आओ

बचा है बस शव छिपाना किसीका

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रोने ना देना उसे क़ब्र के इर्द-गिर्द

रूला देगा चेहरा पुराना किसीका

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© इश्क़शर्माप्यारसे✍📲9827237387

 

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