#Gazal by Ishq Sharma

वक़्त-बे’वक़्त तुमपे, वक़्त कितना निसार करें?

तुम भी करो जाने, हम तुम्हें कितना प्यार करें?

  • ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

अधिकार जितना है मेरा, तुम्हारा भी उतना है

अकेले ही जाना हम,  कितना  इख़्तियार करें?

  • ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

महफ़िल मेरी तुम बिन कितनी, सूनी – सूनी है

कब तलक़ तुम्हारा हम, कितना  इंतज़ार करें?

  • ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

बहला तो लेते है खुदको,मगर ख़ामोश रहते हैं

भीड़ में खुद को हम, और कितना बेज़ार करें?

  • ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

तलब तो मुझको भी है,  तुम्हारे ही दीदार की

तुमको पाने खुदको ही,कितना तलबगार करें?

  • ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

मुझमे कोई ऐब नही था,पर इश्क़ का जुनून है

पागल ना हो जाए दिल,  कितना ऐतबार करें?

  • ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

तुम आओगी आस है, भले ख़ामोश-निराश है

ये बताओ खुदको हम, कितना समझदार करें?

  • ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

ख़्वाबों में जो आओ नज़र तो रोज़ा टूट जाता है

दिली प्यास बुझाने कौनसा-कितना इफ़्तार करें?

  • ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

जो हुआ सो हुआ, अब लौटकर आ भी जाओ

तुम्हारी ही ख़्वाहिश इश्क़, रोज बार-बार करे..

  • ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

© इश्क़शर्माप्यारसे✍📲9827237387

Leave a Reply

Your email address will not be published.