#Gazal by Ishq Sharma

तेरा होना मुश्किल नही था

मेरी तलाश जारी है मुझमें

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सारा दुःख तुझे तेरा दिखा

दर्द कितना भारी है तुझमें

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बता रखा  कहाँ  मेरा दिल

कौन सी शिकारी है तुझमें

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बात-बात पे  आँसू बहाना

खूबये कलाकारी है तुझमें

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रूठू  और  मनाऊं  भी  मैं

ये कैसी दिलदारी है तुझमें

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आदत ना हो सकी तुझसी

जाने क्या खुद्दारी है मुझमें

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ज़रूरी नही तू मिले,  और

कोई न ब्रम्हचारी है मुझमें

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अभी व्यस्त हूँ साथ उसके

जो ता-उम्र हारी है  मुझमें

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मुझसे बेहद प्यार करे  वो

छवि उसकी प्यारी है मुझमें

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उसे वक़्त मैं क्यों ना दूँ..?

पल-पल बलहारी है मुझमें

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दुःख दूर करने  मेरे, जाने

क्या – क्या वांरी है मुझमें

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दुश्मन थर-थर  काँपते है

उसकी पहरेदारी है मुझमें

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उसके स्नेह का मोल नहीं

वही दुनियादारी है मुझमें

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ठुकरा कभी सकता नहीं

उसकी दावेदारी है मुझमें

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देख कभी अपने अंदर क्या

उस सी कोई नारी है तुझमें

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इश्क़शर्माप्यारसे –  98 27 23 73 87

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