#Gazal by Ishq Sharma

तेरी नज़र को मेरी नज़र से देखता हूँ
समंदर की गहराई लहर से देखता हूँ
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
ज़िंदगी दो पल की मेहमान लगती है
जब प्यारमें समाये ज़हर से देखता हूँ
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सारे हसीं ख़्वाब मिट्टी हो जाते है, जब
तुझे और किसीकि नज़र में देखता हूँ
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सोचता हूँ मिलने की मुरादे पूरी होंगी
मैं तुझे जब अपने  शहर में देखता हूँ
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
तमाम ज़ख़्म  दुबारा हरे  हो  जाते हैं
नाम हमारा पुराने शज़र में देखता हूँ
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
ये पागलपन नहीं तो क्या है? बताओ
ख़्वाब तुम्हारे सुब्ह दोपहर में देखता हूँ
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
रिश्ता खत्म तो कर दिया तूने, मगर
आज भी तुझे मैं हमसफ़र में देखता हूँ
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
तुझे हिचकियाँ तो आती ही होगी ना
याद कर तुझे जो हर प्रहर में देखता हूँ
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
©इश्क़शर्माप्यारसे✍9827237387

Leave a Reply

Your email address will not be published.