Gazal by Ishq Sharma

शायद! तेरे सिवा कुछ भी न था, पाने के लिए
इसलिए ही वक़्त लगेगा, तुझे भुलाने के लिए
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ये सर्दी का मौसम और तेरी यादों की गर्माहट
हाँ, ये भी तो ज़रूरी है, ज़िस्म भुनाने के लिए
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महफ़िल में,अब डर सा लगने लगा है मुझको
वो तेरे नाम से बुलाते हैं,  मुझे जलाने के लिए
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कि  अब  तमाम  ज़ख़्म, मेरे घनिष्ठ हो चुके हैं
गहरे हो कर भी  दर्द नहीं देते, सताने के लिए
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वो क्या है न,एक बुरी आदत आज भी है मेरी..
माचिस भूल आता हूँ सिगरेट सुलगाने के लिए
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दरअसल तेरा अक़्स, शायद ही भूल पाऊँगा..
कभी तुझमें खोया था,तुझमें रम जाने के लिए
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यूँ तो बेपर्दा घूमते लाखों नज़ारें – नज़र में हैं….
मगर, कुण्डी अंदर से लगी अंदर आने के लिए
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हमसफ़र बन पाना, इतना भी आसान नहीं…..
मौजूदगी ज़ायज़ होती है,रिश्ते निभाने के लिए
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ख़ैर! ये ग़म-ए-उल्फ़त भी लाज़मी था यारों…..
मुक़म्मल कोशिशें थी,  मुझकों रूलाने के लिए
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लेकिन खलिश यही रहेगी ताउम्र मेरे दिल को
तूने कोशिश न कि घरवालों को बताने के लिए
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जितना साबित किया, उतना भी बुरा नहीं था
ये इश्क़ पागल था, सिर्फ तेरा हो जाने के लिए
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इस सफर का आखिरी वाकया तो सुन ले……
तू सोच न पायेगी, किसी की हो जाने के लिए
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© इश्क़शर्माप्यारसे✍📲9827237387

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