#Gazal by Ishq Sharma

न सम्भली वफ़ा तो, खफ़ा हो गया।

मुझसे कर के दगा, बेवफा हो गया।

 

मैं न जानू उसे अब,ये क्या हो गया।

मेरा यार क्यू मुझसे, ज़ुदा  हो गया।

 

वो बगावत  उसूलों से, करता नही।

फैसला कर लिया, फैसला हो गया।

 

फ़ितरत में उसकी घोटाला नही है।

जो चाहा था उसने,उसका हो गया।

 

आईने  से  सदा  नफरत  थी  उसे।

आईना ही उसका हौसला हो गया।

 

मुस्कान लबो की हो केहता था जो।

मुझे कर के तन्हा वो दफ़ा हो गया।

 

पल के हर पल को सोचता हूँ यही।

ऐसा कर के उसे क्या नफ़ा हो गया।

 

मेरे  साथ रहो उस  से इतना कहा।

मेरा लहज़ा कहाँ से ज़फ़ा हो गया।

 

कोई रोग नाहो मुझसे दुरी बनाली।

उसकेलिये अक्स मेरा ज़र्दाहोगया।

 

रूह जल चुकी मेरी, पैराहन  बचा।

जीतेजी इश्क़ उसका,मुर्दा हो गया।

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