#Gazal by Ishq Sharma

कर के दगा भी, तुम बाज न आए।

आता हूँ कहके,तुम आज न आए।

°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°

इंतेहा  हो  गई,   मेरे  इंतज़ार  की।

मुझको करके तुम नाराज,न आए।

°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°

समझते तो  हो  खुद को बादशाह।

फिर क्यों देखने, मुमताज न आए।

°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°

गुलाबी पत्तियाँ,  बिखर गई सारी।

लेकर के तुम,  सुर  साज न आए।

°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°

मेरे गुलबदन का हरअंग मुरझाया।

कर के भी मुझपर,  नाज़ न आए।

°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°

यह तकलीफ, असहनीय है यारा।

ऐखुदा कभी ऐसा,रिवाज न आए।

°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°

मुझको भूल जाओ,मुझे गम नही।

औरों के साथ ये,मिज़ाज़ न आए।

°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°

कर के दगा भी, तुम बाज न आए।

आता हूँ कहके,तुम आज न आए।

Leave a Reply

Your email address will not be published.