#Gazal by Jagbir Singh Jagan

गज़ल

 

जी रहे थे हम तो इंसान की तरह

जिंदगी में आए वो तुफान की तरह

 

उड़ जाएँगे खाक़ बनकर इश्क में उनके

जल रहे हैं हम तो शमशान की तरह

 

हरगिज कुबूल नहीं है दिल को भूलना उनका

दे गए जख्म जो कद्रदान की तरह

 

दु:ख सुख साँझे हैं अपने ये वादा किया था

मगर खूब लूटा, गगन ,को बेईमान की तरह

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