#Gazal by Jasveer Singh Haldhar

गजल -वीर जवान

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पर्वतों की चोटियों पर आग लाने वो चढ़े हैं ।

नीर की नदियां बहाने रेत के ऊपर खड़े हैं ।

सिंधु के तूफान जिनके हौसलों से हार जाते ,

काल के भी भाल पर वो मौत बनकर के अड़े है ।

सर पटकने को खड़ी वीरान पत्थर की शिलायें ,

और ऊपर और ऊपर शैल चोटी तक बढ़े हैं ।

आचरण है देश रक्षा कर्म से मन से वचन से ,

वीरता के लेख उनके भाल पर दिखते गढ़े हैं ।

दीन दुनियाँ का पता ना  देश सेवा के अलावा ,

पत्थरों के बीच मानो लोह के मानव जड़े है ।

धूल में मिल जाय दुश्मन जो तके टेडी नजर से,

देख कर इनके इरादे अब पड़ौसी रो पड़े है ।

रेत के तूफान हों या बर्फ की चलती हवायें,

हाथ में छाले पड़े है घाव पैरो के सड़े है ।

जाट सिख या राजपुताना कुमाऊं गोरखा हो ,

भारती के मुकुट पर हर रंग के हीरे मढ़े है।

हलधर -9897346173

 

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