#Gazal by Jasveer Singh Haldhar

हिंदी गजल -चलती रहीं पगडंडियां

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राही सभी थक कर गिरे चलती रही पगडंडियां ।

सौदा न पूरा हो सका उजड़ी मिली सब मंडियां ।

कुछ लोग जीवन दे गए इस देश माटी के लिए ,

कुछ भाषणों के दम बढ़े औ जा उखाड़ी झंडियां ।

जब से निकाला पाँव बाहर पथ सभी धूमिल मिले ,

कुछ झोपड़ी कोठी बनी कुछ कोठियाँ बन खंडियां ।

निर्जल मरुस्थल में शहर सूखी पड़ी यमुना नदी,

नकली हवा में थिरकती अब होटलो में संडियां ।

मरता सनातन ही रहा घट काल का भरता नही ,

सबका वरण करता मरण जैसे चिता की कंडियां ।

अब निर्भया जैसा न हो इस बात पर भी ध्यान दो ,

बेटे बनाओ देवता या बेटियों को चंडियां ।

नूतन कला ने नाम पर अब नांच नंगा हो रहा ,

फिल्मी जगत में घुस गई हैं कुछ विदेशी रंडियां ।

हलधर “कभी ना क्रोध के आगोश में कविता लिखो ,

अर्थी बनेगी बाँस की ना काम आवें डंडियां ।

हलधर -9897346173

 

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