Gazal by Jasveer Singh Haldhar

गजल -हिन्दी

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वो राज पथ पर चल रहे हमको मिले फुटपाथ हैं !

हम मध्य तक कीचड़ धँसे उनके हवा में हाथ हैं !

हम चीखते आठों पहर वो भाषणों में व्यस्त हैं ,

वो आसमानों में उड़े हम तो धरा के साथ हैं !

उनके इसारे पर जहाँ में कोंधती हैं बिजलियाँ ,

वो माल शोभित कंठ हैं हम तिलक वंचित माथ हैं !

हम लोग पीछे रह गये वो लोग आगे बढ़ गये ,

वो पैर रख ऊपर चढ़े हमने किए पुरुषार्थ हैं !

वो मौत में उत्सव करें हम शोक में डूबे रहे ,

उनकी दुआ में लोभ है अपनी दुआ में प्राथ हैं !

ये हैं सनातन सिलसिला “हलधर “करो ना अब गिला,

उनकी अलग अपनी नियति हमको सुलभ रघुनाथ हैं !

हलधर -9897346173

 

 

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