#Gazal by Jasveer Singh Haldhar

हिन्दी गजल

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माली उपवन के रखवाले , अब से नहीं जमाने से हैं !

कलियों पर कांटों के ताले , अब से नहीं जमाने से हैं !

मिली नही पूरी आजादी ,खंडित हिंदुस्तान मिला है,

सरहद पर शोणित के नाले ,अब से नहीं जमाने से हैं !

सांची बात महाभारत की ,बुरी लगेगी दिल्ली वालो ,

संसद में जीजा औ साले , अब से नहीं जमाने से हैं !

वातावरण आज भारत का , घुटन भरा बतलाते हैं जो ,

दिल में उनके विष के छाले , अब से नहीं जमाने से हैं !

बटवारे की पढ़ो कहानी ,लाखों जलकर बुझीं जवानी ,

खद्दर धारी दिल के काले , अब से नहीं जमाने से हैं !

धूप रोशनी अगर देश की ,ऊपर ही ऊपर बट जाए,

बेबस को आँखों में जाले , अब से नहीं जमाने से हैं !

मेरी वाणी तो दर्पण है , असली सूरत दिखलाएगी ,

कवियों के छंदों में भाले , अब से नहीं जमाने से हैं !

माना बदकिस्मत है “हलधर ,”लेकिन शब्द साथ देते हैं ,

अँधियारों में दीप उजाले ,अब से नहीं जमाने से हैं !

हलधर -9897346173

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