#Gazal by Jasveer Singh Haldhar

ग़ज़ल(हिंदी)

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आदमी की  जिंदगी भूगोल भी  इतिहास भी है ।

इक अनोखी सी पहेली सत्य भी आभास भी है ।

चित्त काबू में किया तो चाँद तारे गिन लिए हैं ,

बैठ धरती गोद में हमने छुआ आकाश भी है ।

शून्य को खोजा तभी तो नाप दी आकाश गंगा ,

राशियों पर नव गृही प्रभाव का अहसास भी है ।

कब कहाँ क्या रंग बदले द्वंद्व मानस के अतल का ,

गृहस्थ जीवन का पटल है पंथ तो संन्यास भी है ।

मधुर ऋतुओं में बटे हैं साल के बारह महीने ,

जेठ की गर्मी भयानक महकता मधुमास भी है ।

ईश निंदा को यहाँ अपराध माना ही नहीं है ,

योग जप आराधना है नास्तिक परिभाष भी है ।

तर्क आधारित विवेचन सत्य को स्वीकार करना ,

भारती की सभ्यता का रूप ये बिंदास भी है ।

हलधर -9897346173

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