#Gazal by Jasveer Singh Haldhar

गजल -हजज (1222×4)
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घरो में रूह वीरानी यहाँ भी है वहाँ भी है !
लहू की बाढ़ का पानी यहाँ भी है वहाँ भी  है !
वहाँ हैं  हूर के चर्चे  यहाँ हैं मोक्ष की बातें ,
जमातें धरम दीवानी यहाँ भी है वहाँ भी है !
यहाँ हैं जाति के दंगे वहाँ हैं सोच के पंगे ,
लड़ाई ऐक बेमानी यहाँ भी है वहाँ भी है !
यहाँ नक्सल ने घेरा है वहाँ आतंक डेरा है ,
दुखी की आँख में पानी यहाँ भी है वहाँ भी है !
करो आबाद अब बस्ती हटाओ खौफ की गस्ती ,
गरीबों को परेशानी यहाँ भी है वहाँ भी है !
हमारे और उनके बीच कुछ तो ऐक जैसा है ,
उदासी भूख हैरानी यहाँ भी है वहाँ भी है !
हलधर -9897346173

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