#Gazal by Jasveer Singh Haldhar

ग़ज़ल
——
आदमी का आजकल बस एक ही तो काम है ।
झूँठ बोलो रात दिन बस तब कहीं आराम है ।
राज नेता देश में अब सब यही तो कर रहे ,
पाक दामन हो रहा क्यों डील में बदनाम है ।
हैं सभी भाषा सुहानी सीख कर देखो मियां ,
एज दूजे को सदा देती रही पैगाम है।
कुछ सियासी लोग मिलकर कौम को भरमा रहे ,
बात उनकी सुन रहा क्यों देश का अवाम है ।
मंच से नारा गरीबी को मिटाना दे रहा ,
शाम को विस्की भरा उस शख्स के लव जाम है ।
वक्त इतना भी नहीं की खा सकें दो रोटियां ,
पेट रोटी ही भरेगी हुंडिया नाकाम है ।
रोज दारू पी रहे जो मानते हरगिज नहीं ,
जिंदगी वीरान उनकी मौत ही अंजाम है ।
आप भी सोचो जरा जो बात “हलधर”कह रहा ,
पैग दो तक ठीक है हर रोज रंगी शाम है ।
हलधर -9897346173

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