#Gazal by Jasveer Singh Haldhar

ग़ज़ल
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देही बनेगी राख बिखरना है सभी को ।
जाके मिलेगी खाक ठहरना है सभी को ।
कुछ को बहुत ही नाज़ है बांके शरीर पर ,
इक रोज मुर्दा घाट उतरना है सभी को ।
जलते हुए जंगल कहीं ले जा रहे हमें ,
कांटों भरी है राह गुजरना है सभी को ।
क्यों फूल अपने हाथ में पत्थर लिए खड़े ,
जेहादियों को छोड़ मुकरना है सभी को ।
मौसम सुहाना और भी दिखने लगा यहां ,
अब रोशनी के साथ निखरना है सभी को ।
पैदा हुए तो एक दिन जाना जहान से ,
उस मौत के सहरा में विचरना है सभी को ।
आकाश को ऊंचा करो देखो उड़ान को ,
हलधर”चिड़ी के साथ उभरना है सभी को ।
हलधर -9897346173

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