#Gazal by Jasveer Singh Haldhar

गजल -बहर -मुतकारिव(122×4)

————————————

किसी ने मदद कर उभारा नहीं है !

धरा का पुजारी बिचारा नहीं है !!

नहीं धूप देखे नहीं छांव देखे !

पड़ा आन सूखा सहारा नहीं है !!

मरे रोग से या चवा जाय कर्जा !

यहाँ भूख से कौन हारा नहीं है !!

मिला खून माँटी  उगाता जो सोना !

फसा बीच धारा किनारा नहीं है !!

करे काम खेती नहीं भीख मांगे !

किसानी में उसका गुजारा नहीं है !!

कुआ रोज खोदे पिये रोज पानी !

कभी जिंदगी से वो हारा नहीं है !!

हलधर -9897346173

Leave a Reply

Your email address will not be published.